साहब श्री कांशीराम का कर्ज बहुजन समाज पर भारी:-AB टोहानिया
मिशन और बाबा साहब के बिच मुख्य बिंदु बने साहब कांशीराम:- AB टोहानिया
परिवर्तन प्रकृति का नियम
है जो की समय दर समय होता रहता है, लेकिन जो परिवर्तन बहुजन समाज में जन्मे संतो
महापुरुषों ने किया वो वाकई काबिलेतारीफ है, बहुजन समाज के लिए कदापि मान्यवर साहब
श्री कांशीराम के संघर्ष को भुला नही जा सकता, बाबा साहब के मिशन को जगाने वाले
एवम बहुजन समाज को गति देने वाले कांशीराम ने दलितों, पिछडो, वंचित समाज के लिए
अपने वैज्ञानिक पद से इस्तीफा तक देकर बहुजनो के सम्मान में लड़ाई लड़ी, दरअसल बहुजन
समाज की स्थिति उन दिनों कुत्तो से भी बदतर थी जो की बाबा साहब के कर कमलो द्वारा
आज अशोआराम कर रहे है, समाज की बेडियो को लांघकर बाबा साहब ने एक ऐसे समाज का
निर्माण किया जो की वास्तव में ही सराहनीय है, लेकिन उसके फलसवरूप भी बहुजन समाज ने
बाबा साहब के साथ धोका कर साहब को अपने घरो तक से निकाल दिया....साहब श्री
कांशीराम के 82वें जन्मदिन पर newsbus की वार्ता हरियाणा के मिशनरी गायक AB
टोहानिया से हुई जिन्होंने अपने मनुवादी विचारधारा से लेकर अम्बेडकरवादी विचारधारा
तक की बाते newsbus के साथ साँझा की...जिसके कुछ अंश प्रस्तुत है...
AB टोहानिया का कहना है
की वर्तमान केंद्र सरकार की नीतियाँ बहुजन विरोधी नीतियाँ है जो की बच्चों को
स्कूल की पंक्ति में कम और मंदिरों की पंक्ति में लगाने में ज्यादा विश्वास रखती
है लेकिन हाल ही में बनाई गयी कई नीतियाँ तो इतनी खतरनाक है की दलित, शोषित एवम
वंचित वर्ग स्कूल जाने तक की भी नही सोच सकता...वही दिनों दिन विश्विद्यालय स्तर
पर हो रहे दलितों के साथ अत्याचारों की तो बाढ़ सी आ गयी है, क्यूंकि मनुवादी वर्ग
नही चाहते की बहुजन समाज का तबका आगे बढकर तरक्की करें इसलिए in वर्गो ने बहुजन समाज
को टुकडो में बांटकर एक और कर दिया है... AB टोहानिया ने बताया की कुछ वर्षो पूर्व
वो भी मनुवादी व्यवस्था के शिकार थे और अपने आपमें इतने मगन रहते थे की मानो
उन्हें भगवान के साक्षात दर्शन हो रहे हो लेकिन ढोंग, मिथ्या, मोह का जझाल से बहार
निकलकर उन्होंने बाबा साहब की एक फिल्म देखि जिससे की वो बनावती दुनिया से बहार
निकलर सजग रुपी दुनिया में आये और तभी से सामाजिक परिवर्तन की विचारधारा में लग
गये...उनका कहना है की हाल ही में उन्होंने बौध रीती रिवाजो के चलते शादी की जो की
परिवार के विरुद्ध होते हुए भी स्वीकार की...लेकिन समय बदलते देर नही लगती इसलिए
परिवार में एन दिनों स्थितियां स्थिर है....कांशीराम जी के संघर्ष को उन्होंने
बाबा साहब और मिशन के बिच का बिंदु बताया क्यूंकि बाबा साहब का मिशन और बाबा साहब
को मनुवादी लोगो ने अप्रत्यक्ष या लोप कहे तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी, कर दिया था
लेकिन साहब श्री कांशीराम ने मिशन और बाबा साहब का बिच का बिंदु बनकर समाज को नई
राह दी और जय भीम की क्रांति को एक नई पहल से शुरुवात की...

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