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Friday, 2 March 2018
“बुरा ना मानो होली है” की आड़ में मनचलों का स्तनदाब वहशियत

“बुरा ना मानो होली है” की आड़ में मनचलों का स्तनदाब वहशियत

होली की आड़ में मनचले करते है वहशियत की सारी हदें पार 

होली विभिन्न रंगो का त्यौहार रहा है, और इसे भारत और नेपाल में बड़े धूमधाम से मनाते है लेकिन ऐसा नही है कि केवल भारत और नेपाल ही इस पर्व को मना सकते है! कई बार सीरिया, म्यांमार जैसे देश भी इस खूनी होली से बचे नहीं हैं। अब इसे मनाने के लिए किसी होलिका को जलाने की जरूरत नहीं, जिंदा इंसानों का जला देने से ही काम चल जाता है। हां, कभी-कभी इसका रंग-रूप बदल जरूर जाता है, मसलन जातिगत खूनी होली, धार्मिक सौहार्द व दंगे-फसाद की होली, स्थानीय विशेष की होली, लव जिहादी होली, लोगों के उजाड़न की होली। ऐसी होली किसी धर्मविशेष से नहीं जुड़ी होती, इसके लिए राजनीतिक धर्म ही सर्वोपरि है। कहन को होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला भारतीय लोगों का त्योहार है लेकिन खूनी होली देश से लेकर विदेशों में आए दिन खेली ही जाती है जिसके लिए किसी खास मौसम की जरूरत नहीं। अपने यहां पीकर मासूमों को रौंद देने भर से, भूख के लिए चोरी करने पर मार देने से, सांप्रदायिक पिचकारी से खूब खूनी होली खेली जा रही है। और इस धर्म का ताँता बाना कौन बुनता है, किसके द्वारा बुना जाता है इसे आप भली भांति जानते है, मैं स्पष्ट लिखने में भी इसलिए कतरा रहा हूँ क्यूंकि अब कलम पर भी एक विशेष तबके ने अपनी पैठ जमा ली है जिससे की अब पत्रकार खिलाफ लिखने से भी कतराते है, खैर ऐसा नही है कि सभी एक जैसे है!!
मेरा मानना है कि आपको होली पर्व मनाने से पहले जानना चाहिए कि
आखिर होली पर्व मनाते क्यों है ?
होली मनाने के पीछे कारण क्या है ?
होलिका कौन थी ?
होलिका को क्यों जलाया गया ?
प्रह्लाद कौन था, वो आग में क्यों नही जला ?
होलिका के साथ उसका क्या सम्बन्ध था ?
हिरण्यक्श्चप कौन था ? आदि प्रश्नों के जवाब आपको जानने चाहिए...

खैर, आशा करता हूँ कि आप इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए थोडा प्रयास करेंगे, यथार्थ वर्तमान का दृश्य देखे तो एक विशेष तबके को छोड़कर सभी होली/फाग खेलने में मशगुल है और इस मशगुल में किसके साथ क्या क्या घटित हो रहा है इस सबको दरकिनार करके हम मस्ती में मशगुल होते है
लेकिन मैं आपको बीते दो दिन पहले की ही सच्ची घटना बताना हूँ की दिल्ली के ही एक इलाके में कुछ मनचलों ने “बुरा ना मानो होली है’ की आड़ में लड़की के कूल्हों पर वीर्य (स्पर्म) से भरे गुब्बारे फैंके, कितना गन्दा और असहनीय कृत्य लग रहा है लेकिन ये उपज भी आप लोगो की है, अक्सर लडको के बारे में ऐसा कहा जाता है की अपने लडको को ऐसा बनाएगा की उन्हें देखकर लड़की अपने बाल ठीक करें न की दुप्पटा लेकिन यह सोच अभी भी किताबो या भाषणों तक ही सिमित है, बरहाल आप अपने आसपास के माहोल को भी देखते होंगे जिसमे “बुरा ना मानो होली है” का सहारा लेकर महिलाओ/ लड़कियों के साथ अभद्रता करने का मामला सामने आता है और यदा कदा मौका लगने पर स्त्री के नितम्ब को दबाना भी बुरा ना मानो होली है में शामिल हो जाता है, और इसका न तो विरोध किया जाता है और न इसे घिनोने कृत्य में शामिल किया जाता है इसलिए महिलाओं/ लड़कियों को इस कृत्य पर सोचने व समझने की जरूरत है जिससे की मनचलों के बढ़ते साहस को रोका जा सके!!


(इसी सोच और विचार के साथ मैं आशा करता हूँ कि मेरे द्वारा यदा कदा लिखे जाने वाला लेख आपको पसंद आया होगा, आपका अपना मित्र संदीप कोली)
Thursday, 18 January 2018
कुकर्म पीडिता के लिए बरती जाने वाली सावधानियां

कुकर्म पीडिता के लिए बरती जाने वाली सावधानियां

समाज में बढ़ते कुकर्म को देखते हुए मैं कुछ जानकारी साँझा कर रहा हूँ, इस जानकारी को केवल यह मत नही है कि मैं इस प्रकार की घटना के लिए हतोत्साहित कर रहा हूँ, कुकर्म पीडिता के लिए भारतीय दंड सहिंता के तहत निम्नलिखित कानून बनाये हुए है जिसके तहत वह अपनी सिकायत दर्ज करा सकती है...धारा 375, 376, 376क, 376, 376ग, 376घ और कुछ विशष प्रावधान के तहत.....आइये यहाँ हम जानते है कुछ साधारण बाते जिनके बारे में कई बार गलती कर जाते है और शर्म लिहाज के हिसाब से उन्हें सार्वजानिक करने में हिचकिचाहट करते है जो की कदापि नही करनी चाहिए ...
कुकर्म (बलात्कार) पीडिता को क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए...
·         अपने परिवार वालो या दोस्तों को बताये,
·         इस तरह के मशलो में बिलकुल भी शर्म ना करें
·         जब तक मेडिकल और FIR दर्ज न हो जाये तब तक नहाये नही
·         जिन वस्त्रो में कुकर्म हुआ है, उन्हें न धोये
·         ऐसा करने से महत्वपूर्ण निसान रह जाते है जो जाँच करने में साक्ष्य साबित होते है
·         कुकर्म करने वाले व्यक्ति का हुलिया (चेहरा) की पहचान करें
·         तुरंत FIR करवाए, और साथ में परिवार या किसी अन्य को साथ ले जाएँ
·         घटना की विस्तारपूर्वक जानकारी दर्ज कराए
·         जबरदस्ती सम्भोग का बिंदु जरुर लिखवाए
·         FIR  की कॉपी अवश्य लें, मेडिकल चेक up जरुर कराए
·         जबकि यह पुलिस का कर्तव्य है की वो जाँच कराए
·         मेडिकल जाँच की कॉपी अवश्य लें
·         मेडिकल जाँच के दौरान पुलिस कुकर्म हुए कपड़ो को सिल बंद करती है,
·         जिससे की जाँच की पुष्टि हो सके, कपड़ो की रसीद प्राप्त करें
·         पीड़ित स्त्री की पहचान सार्वजानिक करना अपराध के अनुरूप आता है
·         जाँच के दौरान स्त्री का पूर्व व्यवहार नही देखा जाता
विशेष नोट:- कई प्रस्थितियों में देखा जाता है कि पुलिस द्वारा FIR दर्ज नही की जाती जिसके चलते काफी महिला/स्त्रियों को न्याय नही मिल पाता इस स्थिति में आप जिला कलेक्टर/ स्थानीय या रास्ट्रीय समाचार पत्र या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया/ या फिर राष्ट्रिय महिला आयोग में भी अपनी सिकायत दर्ज करा सकती है ...


जवाहरलाल नेहरु की नाजायज औलाद है अमिताभ बच्चन !!

जवाहरलाल नेहरु की नाजायज औलाद है अमिताभ बच्चन !!

आपको जानकर बेहद आश्चर्यजनक होगा की बीसवी सदी के बॉलीवुड अभिनायक अमिताभ बच्चन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की नाजायज औलाद है, रुकिए जनाब गाली गलोच करने से पहले जरा पूरा लेख पढ़ लीजिये और अगर आपको कुछ भी संदेह हो तो जरा सभ्यता से पेश आते हुए जान लीजिये की इसके पीछे क्या कारण रह...दरअसल में भली भांति जानता हूँ की कांग्रेसियों के हलक से यह बात बिलकुल भी गले न उतरे लेकिन इसके कुछ प्रमाण भी मैं आपको बताने वाला हूँ जिससे की आपको भी भरोसा हो जायेगा, हुआ यूँ की अमिताभ बच्चन की माँ तेजी बच्चन और जवाहर लाल नेहरु की बेटी इंदिरा नेहरु (बाद में गाँधी द्वारा गोद लिए जाने के बाद गाँधी बनी) के बिच गहरी दोस्ती थी और इसी के चलते तेजी बच्चन का नेहरु परिवार में आना जाना लगा रहता था, और सूत्रों के हवाले से बताया जाता है कि उन दिनों तेजी बेहद सुंदर जवानी की मजूमदार थी, इसी के चलते जवाहर लाल नेहरु और तेजी एक दुसरे के प्रति कब आकर्षित हो गये पता ही नही चला, समय बीतते-बीतते एक दुसरे प्रेम प्रसंग में इतने मशगुल हो गये कि इस प्रेम की निशानी के तौर पर अबिताभ बच्चन का जन्म हुआ, (स्पष्ट शब्दों में कहूँ तो प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की नाजायज औलाद के तौर पर), इसके बाद अच्छी खासी कहानी एक दरमियाँ मोड़ लेती है कि राजनीति रसुक के चलते नेहरु अमिताभ को अपना बेटा स्वीकार करने में असमर्थ होते है जिसके चलते नेहरु ने अपने शिष्य हरिवंशराय बच्चन के गले में मरा सांप घालकर अपना पीछा छुडाते है, (सीधे शब्दों में कहे तो तेज की हरिवंश राय बच्चन के साथ शादी करवा देते है) लेख काफी बड़ा हो रहा है फिर भी चलिए आपको बता ही देता हूँ आखिर सदी के महानायक की सच्चाई क्या है तो अब विषय आकर हरिवंशराय बच्चन पर अटकता है इसलिए इनके बारे में भी मैंने गहनता से पढ़ा जिसके चलते मुझे ज्ञात हुआ की सन 1941 में हरिवंश राय की पत्नी का देहांत हो गया था जिसके चलते बच्चन साहब नेहरु की नाजायज औलाद अमिताभ को भी अपना बेटा स्वीकारने के लिए राजी हो गया, और इस दौरान नेहरु को लगा कि अब मोहब्बत का खेल खत्म हो जायेगा इसलिए शादी कराने के बाद प्रधानमन्त्री ने हरिवंश राय को 10 साल के लिए कही बहार विदेश शोध करने के लिए भेज दिया इस दौरान भी तेज बच्चन प्रधानमंत्री आवास में ही रही, अधिक जानकारी के लिए मैं आपको बता दूँ की यह लेखनी newsbus.in की कॉपीराइट लेखनी है, और इस लेखनी का सर्वाधिकार सम्पादक महोदय संदीप कोली के पास सुरक्षित है, newsbus.in इस प्रकार की हकीकत के लिए दावा नही करती लेकिन “हेडलाइंस टुमारो’’ के शोधकर्ताओं और डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक जवाहरलाल नेहरु ही अमिताभ बच्चन के असली पिता है ..... 
Monday, 14 August 2017
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71वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर समर्पित है आज़ादी के कुछ दंश

लेखक:- संदीप क, (मुक्त पत्रकार एवम आकांक्षी, भारतीय प्रशासनिक सेवा)

नमस्कार भारत,       
मैं आज़ादी बोल रही हूँ, मुझे खेद है की आजकल आपकी प्यारी आज़ादी की याद आपको चंद मौको पर ही आती है, और जब भी आती है केवल दंश झेलते फलकों में ही सिमट जाती है, क्या आपको याद है आज से 70 साल पहले आप मेरे लिए दिन रात आहे भर भर तड़फते थे और जब भी मेरी याद आती थी आप कभी सत्याग्रह आन्दोलन, कभी असहयोग आन्दोलन, कभी भारत छोडो आन्दोलन करते थे, हाँ मैं भली भांति जानती हूँ की तुम मुझे गत सालो के अन्तराल में भूलते जा रह हो, लेकिन प्रिय भारत याद रखना कही एकदिन ऐसा न आये की तुम मुझे फिर से खोकर पाने की लालसा करते रहो....
वैसे सच तो ये है की तुम्हारे हालातों को देखते हुए मुझे खुद पर रोना आता है, क्यों में तुम्हारे दामन थामे सहमी सी छोटी सी कोठरी में बंद हो गयी, तुमसे अच्छे तो वो लाल टोपी और काली पतलून वाले ही थे जो कम से कम दिनोप्रांत याद दिलाते रहते थे की मैं अभी जिन्दा हूँ, लेकिन नालायक भारत तेरा क्या, तूने तो मुझे इतने असहनीय दर्द दिए है की मैं कभी तुझ पर भरोसा तो दूर की बात साथ तक नही चल सकती...
याद रखना मैं वही तुम्हारी आज़ादी हूँ जिसे तुम सन 1765 से ही पाने का प्रयास कर रह थे लेकिन तुम्हे मुझे पाने में ही करीब दो शताब्दी लग गयी, अब धीरे धीरे तुम्हे दंश की दीवारों को लांघकर मेरे साथ चलना होगा, क्यूंकि अब मैं तुम्हारा बोझ और ज्यादा नही सह सकती, तुम्हारे गर्भ में बसने वाले लोग इतने दुष्टाचारी हो चुके है की मुझे उनके पास रहने तक में भी डर लगता है, वास्तव में भारत, कभी समय मिले तो खुद से जरुर पूछियेगा की क्या वास्तव में तुम्हारी स्थिति इतने काबिल तक नही रही की तुम यही एक विशेष वर्ग को छोड़कर अन्य वर्गो का भी लालन पालन कर सको...
वैसे तो भारत, तुम्हारा आचरण मुझे सन 1946 में धर्मोपदेश के नाम पर विभाजन करने की मनोवृति पहले ही झलक रही थी लेकिन मैं भी क्या करती, लाल टोपी के अत्याचारों से भी तंग आ गयी थी, एक पूर्वोतर समय था जब मैंने तेरा दामन थामने की सोची लेकिन मुझे नही पता था की तेरा दामन महिलाओं की आबरू से दुराचार, जातिवाद से लिप्त, भ्रष्टाचार का शिखर और कई बड़ी महामारी से लिप्त होगा...
मैं जानती हूँ तुम्हे मेरी बातो को सुनकर दर्द हो रहा होगा लेकिन भला मैं भी क्या करती आज से 70 सालो तक तुझे सहन करती ही तो आई हूँ, सच में ज्यादा नही तुम खुद ही अपने आप से पूछना की तेरे गर्भ में रह रहे लोगो का आज़ादी का मतलब ही स्वतंत्रता दिवस और गणतन्त्रता दिवस होता है, क्या इन दिवसों के अलावा भी उन्होंने मेरे आंगन को कभी सजाया और सवारा है ? क्या उनको मुझे दंश पहुचाने के अलावा मेरी याद आई? क्या उनको मेरी आबरू (पर्यावरण-पेड़-पौधे) की कोई कदर है? क्या उनको मेरे गहनों (प्राक्रतिक वनस्पति) के आवरण को समाप्त करने का अधिकार है? लेकिन मैं कहा इतनी तमीज की बात करने लगी, तुम्हारे ग्रभाधारी लोगो को एक दुसरे की टांग खींचने और चंद लोगो का कटोरा भरने से फुर्सत मिले तब न?
खैर जो भी लेकिन भारत, इतना तो साफ है की तुम्हारा भविष्य मुझे दिनोप्रांत डूबता ही नजर आ रहा है, क्यूंकि तुम्हारे अंदर समायोजित करने की क्षमता समाप्त हो चुकी है और तुम अपनी आज़ादी का मतलब ही कुछ और समझ बैठे हो? जबकि तुम अच्छे से जानते हो की एशियाई लोगो की नजर तुम पर टकटकी लगाये तुम्हारे दामन को दिनों दिन घुर रही है, और वो दिन दूर नही जब तुम्हारे हाथो के कंघन, गले की माला, और नथनी से सजी सुंदर काया किसी विदेशी हाथो में होगी, वैसे तो भारत तुम्हारा आबरू के साथ खिलवाड़ पुरानी सदियों का धंधा रहा है लेकिन फिर भी तुम्हे कुछ तो सोचना चाहिए, चंद उदाहरण के तौर पर महाभारत में द्रौपदी, रामायण में सीता, मनुस्मृति में नारी, और आधुनिक भारत में नवजात बच्चियों के साथ बलात्कार की घटना आम हो गयी है....
मुझे खुद पर शर्म आती है की मैं इतना कुछ सहते हुए भी तुम्हारी गोदी की कठपुतली बने तुम्हारे आंगन में हंसती खेलती हूँ, सच में भारत मुझे रोना आ रहा है इतने से ज्यादा में बखान नही कर सकती, लेकिन इस संदर्भ को जरुर याद रखना की तुम्हारे भीतर ह्रदय में अनगिनत कमी होने के बावजूद में तुम्हारे साथ डटी हुयी हूँ, अच्छा भारत अपना ख्याल रखना मैं चलती हूँ, 26 जनवरी पर फिर मिलूंगी...आपकी प्यारी आज़ादी, खैर औपचारिक रूप से आपको भी स्वतंत्रता दिवस की मंगलमय कामनाएं  
लेखक:- संदीप क, (मुक्त पत्रकार एवम आकांक्षी, भारतीय प्रशासनिक सेवा)
नोट:- इस लेख के सम्पूर्णत अधिकार सुरक्षित है, इस लेख की प्रतिलिपी करने, प्रिंट करने, या मशिनियुक्त छापने एवम एलोक्ट्रोनिक प्रयोग करने हेतु लेखक की अनुमति आवश्य है,



Friday, 14 July 2017
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*जाति सर्वे बता देंगे कितना है पिछड़ापन....!

पदोन्नति में आरक्षण विषय पर न्यायपालिका द्वारा दिया गया निर्णय कि सरकार यह बताये कि संबंधित उच्च पदों पर आरक्षित वर्गो का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नही है।सबसे पहली बात कि किस प्रकार के आंकड़े हमारी न्यायपालिका चाहती है? क्या इस प्रकार किये जा रहे सर्वे काफी नही है और यदि नही तो फिर जाती आधारित जनगणना कराई जाए,ताकि इन वर्गों की वास्तविक स्तिथि का पता लगाया जा सकेगा। लेकिन हमारा सवर्ण समाज चाहे वह किसी भी पड़ पर क्यों न हो , नही चाहता कि जाति आधार पर किसी भी प्रकार के सर्वे किये जायें।पदोन्नति में आरक्षण अथवा जाति आधारित जनगणना जातिवाद को बढ़ावा देगी,ऐसा मानने वाले लोग अक्सर भूल जाते है कि जाति इस देश मे हजारो साल से मौजूद है और वह किसी भी प्रकार से कम नही हुई है।
आरक्षण के नाम पर नाक- भौं सिकोड़ने वालो को यह जान लेना चाहिए कि यदि आरक्षण गलत है,तो सबसे पहले जाति को समाप्त करना होगा।केवल राजनीतिक स्तर पर ही नही वरन सामाजिक स्तर पर भी। साधारण शब्दो मे कहा जाए, तो आरक्षण श्रेणीबद्ध समाज को समानता पर आधारित समाज मे बदलने का संविधान के माध्यम से किया गया कानूनी प्रावधान है।हालांकि यह बात जरूर है कि इसमें अभी तक सरकारी सेवाओं में उच्च पदों पर स्थापित सवर्ण समाज के वर्चस्व को जरूर खतरा है।सवर्ण समाज से आने वाले हमारे कुछ साथियों का मानना है कि पदोन्नति में आरक्षण दिए जाने से इन दलित आदिवासी वर्गो से आने वाला व्यक्ति उनसे पहले प्रमोशन पा जाएगा,तो ऐसा भी नही है।संविधान में स्पष्ट रूप में लिखा गया है कि इन वर्गों से आने वाले व्यक्ति को मापदंडो में कुछ छूट दी जाएगी,न कि सभी मापदंड ही समाप्त किये जायेंगे।जहां तक मेरिट का सवाल है,तो मेरिट तो एकलव्य के पास भी थी और जो अर्जुन से भी तेज तर्रार धनुर्धर था,लेकिन द्रोणाचार्य ने एकलव्य की मेरिट को नही वरन एकलव्य की जाति को देखा था।इसी प्रकार मेरिट शम्बूक ऋषि के पाश भी थी,लेकिन राम ने केवल उनकी नीच जाति को ही ध्यान में रखकर ही उनकी हत्या कर दी थी।मेरिट की बात करने वालो को यह बात हमेशा याद रखना चाहिए कि प्रतिस्पर्धा बराबर स्तर वालो में की जाती है।भारतीय समाज श्रेणीक्रम पर आधारित है,जहाँ प्रत्येक वर्ग एक दूसरे से पद प्रतिष्ठा में ऊंचा या नीचा है.............!!
*द्वारा-दुर्गेश यादव"गुलशन"*
*(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष है।)*
Sunday, 18 June 2017
मिशनरी सिंगर संजु आर. जे. समेत 15 लोगो पर देशद्रोह का मामला दर्ज

मिशनरी सिंगर संजु आर. जे. समेत 15 लोगो पर देशद्रोह का मामला दर्ज

प्यूपल यूनियन फॉर सिविल राईट हरियाणा ने पुलिस रवैये को ठहराया संगीन

नई दिल्ली/ संदीप K 12 मार्च को अम्बाला के पतरेहड़ी गांव में राजपूत बिरादरी और एससी समुदाय के बीच विवाद हो गया था। इसके चलते दोनों समुदाय के बिच आये दिनों मामला बढ़ता ही जा रहा था जिसमे पुलिस ने कार्यवाही करते बेकसूर लोगो को भी गिरफ्तार किया, वही दलित समाज के निम्न संगठनो ने अनुसूचित जनजाति के निर्दोष लोगो को बरी करने के बाबत करनाल में अपनी मांगो को लेकर प्रशाशन से गुहार लगाई और करनाल शहर में ही पधारे सीएम मनोहर लाल खट्टर से भी मिलने एससी समाज का उच्च शिष्टमंडल की टीम भी मिलने पंहुची, और शांतिपूर्ण ढंग से अपना ज्ञापन सौपा
    वही गत 16 जून को रास्ट्रीय अख़बार दैनिक भास्कर में छपी सुचना के माध्यम से मामला साफ़ होता है की खट्टर प्रशाशन द्वारा दलित समुदाय के 15 लोगो पर पुलिस प्रशासन ने देशद्रोह का मामला दर्ज कर भारतीय दंड सहिंता की अन्य 8 धाराओं के तहत कार्यवाही के आदेश दिए है जबकि शिष्टमंडल के सदस्य अधिवक्ता मनदीप ने कहा की शिष्टमंडल पर एस तरह के संगीन आरोप एकदम बेबाक और निराधार है जबकि एस तरह का कोई रवैया शिष्टमंडल की और से नही किया गया जिससे की आमजन को किसी भी प्रकार की हानि हो...
     इसी मामले में newsbus टीम की हरियाणा के मशहूर मिशनरी सिंगर और कई राज्यों में अपनी मिशनरी गानों और वक्तव्य से छाप छोड़ छुपे संजू आर.जे. से बातचीत हुई जिसमे उन्होंने बताया की वो स्वम भी दलित समाज को इंसाफ दिलाने के लिए बहुजन समाज सहित करनाल के कर्ण पार्क में एकत्रित होकर शांति पूर्ण ढंग से निर्दोष लोगो की गिरफ्तारी को बरी करवाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे थे, उसी दौरान पोलिस की भारीकम टीम ने धरने पर बैठे लोगो पर हमला बोल दिया और जबरदस्ती से गाडियों में डालकर ले गये जिनमे भारी संख्या में लोगो की गिरफ्तारी की गयी, और उनपर पुलिस ने संगीन आरोप लगते हुए देशद्रोह का मामला दर्ज किया और भारतीय दंड सहिंता की 8 धाराओं समेत कार्यवाही करने का मामला दर्ज किया...जिसमे संजू आर जे समेत 14 लोगो पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया, जबकि दशद्रोह की धारा लगाने के मामले की जांच करने चंडीगढ़ से करनाल गए पियूपल यूनियन फार सिविल राइट हरियाणा (पीयसीआर) टीम ने बताया कि सीएम के विधानसभा क्षेत्र में पुलिस की इस कार्यप्रणाली साबित हो रहा है कि पुलिस कैस मानव अधिकारों का हनन कर रही है।

   वही संजू आर जे का कहना है की इस देश में प्रत्येक व्यक्ति बाबा साहब द्वारा बनाये गये सविंधान में मौलिक अधिकार दिए गये है जिससे की वो अपने अधिकार को सुरक्षित रख सके वही बाबा साहब के मौलिक अधिकारों में शोषण के विरुद्ध अधिकार को “फादर ऑफ़ फंडामेंटल राईट” का अधिकार देते हुए कहा की यह अधिकार किसी भी हालत में मौलिक अधिकारों का हनन नही होने देगा, लेकिन इस मामले में कही न कही हमारे मौलिक अधिकारों को पुलिस प्रशाशन की और से कुचते हुए धरनास्थलियो पर देशद्रोह का मामला लगाया, जिससे साफ़ प्रतीत होता है की लोकतंत्र में अपनी बात को अपने रखने के लिए भी देशद्रोह के मामले से जूझना पड़ता है, जबकि सविंधान के अनुछेद 19 (1) क के माध्यम से प्रत्येक भारतीय नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गयी है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देशद्रोह का मामला लगाने की दूकान का क्या ठिकाना है और कितना जायज है शायद इसका जवाब सिमित नही है ?
    संजू ने अपने तेज तरार बयानों में दो टूक करते हुए कहा की इस तरह की मनसा अम्बेडकरवादियो को दबाने के लिए और भविष्य के कोई भी अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति एवम पिछड़ा वर्ग की आवाजो को दबाने के लिए साफ़ दिखती है, लेकिन उनके शब्द स्थिति को दागते हुए कहते है कि:-
संघर्ष करण आले लोग मरे पाछै भी जिन्दा रया करै..
अर जमीर तै समझोता करण आले जिंदा मुर्दे होया करै..
अब आपके हाथ में है आप क्या चुनेंगे ?

जैसे इंकलाबी शब्दों से ही साफ हो जाता है की हम आने किसी भी प्रकार की कठिनाइयों से नही डरेंगे और छोटी सोच के लोगो की मंशा को अंजाम देते हुए आगे बढ़ेंगे और भविष्य में भी किसी भी प्रकार का अत्याचार नही सहेंगे.....
Saturday, 29 April 2017
Pakhandi Baba Ne Li Doctor Ki Jagah

Pakhandi Baba Ne Li Doctor Ki Jagah

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