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''दास्तां-ए-हालात''
Thursday, 18 January 2018

कुकर्म पीडिता के लिए बरती जाने वाली सावधानियां

समाज में बढ़ते कुकर्म को देखते हुए मैं कुछ जानकारी साँझा कर रहा हूँ, इस जानकारी को केवल यह मत नही है कि मैं इस प्रकार की घटना के लिए हतोत्साहित कर रहा हूँ, कुकर्म पीडिता के लिए भारतीय दंड सहिंता के तहत निम्नलिखित कानून बनाये हुए है जिसके तहत वह अपनी सिकायत दर्ज करा सकती है...धारा 375, 376, 376क, 376, 376ग, 376घ और कुछ विशष प्रावधान के तहत.....आइये यहाँ हम जानते है कुछ साधारण बाते जिनके बारे में कई बार गलती कर जाते है और शर्म लिहाज के हिसाब से उन्हें सार्वजानिक करने में हिचकिचाहट करते है जो की कदापि नही करनी चाहिए ...
कुकर्म (बलात्कार) पीडिता को क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए...
·         अपने परिवार वालो या दोस्तों को बताये,
·         इस तरह के मशलो में बिलकुल भी शर्म ना करें
·         जब तक मेडिकल और FIR दर्ज न हो जाये तब तक नहाये नही
·         जिन वस्त्रो में कुकर्म हुआ है, उन्हें न धोये
·         ऐसा करने से महत्वपूर्ण निसान रह जाते है जो जाँच करने में साक्ष्य साबित होते है
·         कुकर्म करने वाले व्यक्ति का हुलिया (चेहरा) की पहचान करें
·         तुरंत FIR करवाए, और साथ में परिवार या किसी अन्य को साथ ले जाएँ
·         घटना की विस्तारपूर्वक जानकारी दर्ज कराए
·         जबरदस्ती सम्भोग का बिंदु जरुर लिखवाए
·         FIR  की कॉपी अवश्य लें, मेडिकल चेक up जरुर कराए
·         जबकि यह पुलिस का कर्तव्य है की वो जाँच कराए
·         मेडिकल जाँच की कॉपी अवश्य लें
·         मेडिकल जाँच के दौरान पुलिस कुकर्म हुए कपड़ो को सिल बंद करती है,
·         जिससे की जाँच की पुष्टि हो सके, कपड़ो की रसीद प्राप्त करें
·         पीड़ित स्त्री की पहचान सार्वजानिक करना अपराध के अनुरूप आता है
·         जाँच के दौरान स्त्री का पूर्व व्यवहार नही देखा जाता
विशेष नोट:- कई प्रस्थितियों में देखा जाता है कि पुलिस द्वारा FIR दर्ज नही की जाती जिसके चलते काफी महिला/स्त्रियों को न्याय नही मिल पाता इस स्थिति में आप जिला कलेक्टर/ स्थानीय या रास्ट्रीय समाचार पत्र या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया/ या फिर राष्ट्रिय महिला आयोग में भी अपनी सिकायत दर्ज करा सकती है ...


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