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''दास्तां-ए-हालात''
Wednesday, 15 March 2017

बहुजन का प्रचम लहराना चाहते थे साहब कांशीराम:- संजू आरजे

भावुक परिस्थियों में सबसे ज्यादा प्रेरणा स्त्रोत है साहब कांशीराम:- संजू आरजे 
इतिहास में 15 मार्च 1934 का दिन सुनहरे पन्नो में दर्ज है, जी हाँ आपको याद ही होगा एस दिन बहुजन क्रांति के महानायक मान्यवर साहब श्री कांशीराम का जन्म पंजाब के रोपड़ जिले के गाँव खवासपुर में हुआ, और इसी दिन से बहुजन क्रांति की लौ तन मन में लगने का नाम लेती है, बहुत से लोगो का कहना है की बाबा साहब का दूसरा नाम कांशीराम-कांशीराम...दरअसल आप जानते होंगे की बाबा साहब इतिहास के पन्नो में कितना बड़ा नाम है और उनके नाम की किसी व्यक्ति को संज्ञा देना किस हद तक जायज है और हाँ अगर उनके नाम की संज्ञा दी जाती है तो फिर उस सख्श ने ऐसे क्या क्या कार्य किये होंगे जो बहुजन मुक्ति के महानायक कहलाये, इन्ही विषयों पर newsbus के साथ चर्चा करते हुए हरियाणा के सामाजिक परिवर्तनकर्ता एवम मिशनरी गायक संजू आरजे के साथ हुई सयुंक्त वार्ता के कुछ अंश हम आपके साथ साँझा कर रह है....संजू आरजे का कहना है की मान्यवर साहब श्री कांशीराम का संघर्षमय जीवन वास्तव में ही बहुजन क्रांति का अहम हिस्सा बनकर उभरा जो की बहुजन की मुक्ति एक कारण भी ज्ञात होता है...उनका कहना है की जब भी वो भावुक होते है तो मान्यवर साहब श्री कांशीराम के संघर्षमय जीवन को याद करके उनके संघर्ष से ही प्रेरणा लेते है....
लेकिन वर्तमान में कांशीराम जी के सपनो के भारत को बहुजन का एक बड़ा तबका खत्म करने में लगा है जो की बहुजन के मुहं पर करारा तमाचा नजर आता है...जबकि सही मायने में नजर डाले तो वर्तमान में बसपा का वोट बैंक भी हाल ही के दिनों में भी मान्यवर साहब श्री कांशीराम का ही वोट है जो की अब ओबीसी वर्ग का अलग हो जाना एक अलग ही सूचि में डाला जाता है, लेकिन संघर्ष इंसान का सबसे बड़ा मन्त्र है जो की इंसान को हमेशा करते रहना चाहिए, दरअसल कई बहुजन साथी भी उनसे व्यक्तिगत पूछते है की आप बसपा के इतने कट्टर एवम सुदृढ़ व्यक्तित्व क्यों अपनाए हुए है तो संजू आरजे का उनके लिए एक ही प्रतिउत्तर नजर आता है जो की बहुजन क्रांति के लिएबहुत कुछ सिखने के लिए चिन्ह छोड़ता है, उनके कहना है की उनके दादा जी, पिता जी, एवम वो खुद बहुजन क्रांति के लिए शुरुवात से ही संघर्ष करते नजर आयते है क्यूंकि बहुजन समाज के लिए संघर्ष करना उनके लिए विरासत में मिला है, खैर जो भी हो लेकिन यह बात गौर करने की है की बहुत से लोगो को विरासत में धन, जमीं, राजनीति, पद और बहुत कुछ मिलता है लेकिन संजू आरजे को नील संघर्ष मिला जिसे वो भली भांति परिवर्तन में तब्दील कर प् रह है...उनका कहना है उत्तर प्रदेश में मिली हार का कारण हमारा संघर्ष नही बल्कि हमारी कमजोरी एवम evm मशीन में धाधली नजर आती है जो की सरासर गलत है, संजू कहते है की उसी का दूसरा पहलु अगर देखे तो बहुजन समाज मीडिया स्तर पर भी कमजोर दिखाई पड़ता है क्यूंकि बहुजन समाज से जुडी खबरों को मनुवादी मीडिया स्थान नही देता इसलिए अब आन पड़ी है की बहुजन भी अपना मीडिया तैयार करे जिसके माध्यम से बहुजनो के साथ हो रहे अत्याचारों को जनता तक दिखाया जा सके और उसपर उचित से उचित कदम उठाया जा सके...संजू आरजे ने बहुजन समाज पर आरोप लगाते हुए कहा की वर्तमान में देखे तो ओबीसी वर्ग बसपा के साथ नजर नही आता क्यूंकि उन्हें लगता है की बहुजन समाज के बेंतेहा मुद्दों के मायने बदल गये है, और अपने परिवारवाद में फंस कर ओबीसी ववर्ग कही न कहीं अन्य राजनीति दलों का फायदा उठाना चाहता है, जो की बहुजन समाज को समझने की जरूरत है, उनके द्वारा दिए गये सदेश में साफ़ तौर पर नजर आता है की कहीं न कहीं बहुजन समाज को समय रहते सोचने व समझने की दरकरार है जो की आने वाले समय में एक बड़ी क्रांति का रूप धारण करेगा...

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